हमारी आशाओं पर तुषारापात न करो.
देकर नफरत अरमां पे आघात न करो..
तुम्हारे ही खातिर हमने
प्यार जवां रखा है
चाहत है सुर्ख इरादों में
निखार जवां रखा है
दिल में हमारे दर्द की बरसात न करो.
हमारी आशाओं पर तुषारापात न करो..
नफरत हमने झेला है
इस खुदगर्ज संसार में
मिला है बस रंज ही रंज
स्वार्थ के बेमतलबी धार में
देकर जख्म हमें उपेक्षित बलात न करो.
हमारी आशाओं पर तुषारापात न करो..
बिखर गए है जहां में
मोतियों की माला जैसे
अश्क गहन है आखों में
होटों में छलकते प्याला जैसे
अश्रु में डुबो कर हम पे बज्राघात न करो.
हमारी आशाओं पर तुषारापात न करो..
हमारी आशाओं पर तुषारापात न करो..
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