Monday, 28 November 2011

तुषारापात

 हमारी आशाओं पर तुषारापात न करो.
देकर  नफरत अरमां पे आघात न करो..
 तुम्हारे ही खातिर हमने 
प्यार जवां रखा है
चाहत है सुर्ख इरादों में 
निखार  जवां रखा है
दिल  में हमारे दर्द की बरसात न करो.
हमारी  आशाओं पर तुषारापात न करो..
नफरत हमने झेला है
इस  खुदगर्ज संसार में 
मिला है बस रंज ही रंज 
स्वार्थ  के बेमतलबी धार में 
देकर जख्म हमें उपेक्षित बलात न करो.
हमारी  आशाओं पर तुषारापात न करो..
बिखर गए है जहां में
मोतियों की माला जैसे
अश्क गहन है आखों में 
होटों में छलकते प्याला जैसे 
अश्रु में डुबो कर हम पे बज्राघात न करो.
हमारी  आशाओं पर तुषारापात न करो..
हमारी  आशाओं पर तुषारापात न करो..

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