"प्रेम-कमल"
Thursday, 19 January 2012
Saturday, 31 December 2011
ठण्ड की रुत में आ जा..
ठण्ड की रुत में आलम गरमाने आ जा..
मस्त मौसम में खिलके मुस्कुराने आ जा.
बह रही चहुओर सुगन्धित बयार सुहावनी ...
बनकर बहारे आशनाई मस्त बताने आ जा...
खो जाऊ मै तेरे निखरे मदमाते यौवन में ...
जवानी की उफनती धार बहाने आ जा..
देखा नहीं हू तुझे अर्से से ऐ मितवा मेरे ...
बना कर कोई बहाना मुझे दिखाने आ जा...
तुझ संग जुड चुकी है जिंदगी मेरे यारा .....
मुझ संग प्रेम भरे गीत गुनगुनाने आ जा...
मस्त मौसम में खिलके मुस्कुराने आ जा.
बह रही चहुओर सुगन्धित बयार सुहावनी ...
बनकर बहारे आशनाई मस्त बताने आ जा...
खो जाऊ मै तेरे निखरे मदमाते यौवन में ...
जवानी की उफनती धार बहाने आ जा..
देखा नहीं हू तुझे अर्से से ऐ मितवा मेरे ...
बना कर कोई बहाना मुझे दिखाने आ जा...
तुझ संग जुड चुकी है जिंदगी मेरे यारा .....
मुझ संग प्रेम भरे गीत गुनगुनाने आ जा...
Saturday, 24 December 2011
इन्तजार
मुन्तशिर हो चले है तेरे प्यार में..
टूट चुके है हम इस संसार में..
सूझती नहीं कोई राह हमको..
भरते है आहे बस इन्तजार में...
तुम जो अगर होती साथ तो..
समय न गुजरता बेकार में..
हो जाते हम इक दूजे के यहाँ...
दिल नहीं तडफता बेकरार में...
सुना है बहुत से दीवाने है तेरे..
समझ लो हम भी है कतार में...
टूट चुके है हम इस संसार में..
सूझती नहीं कोई राह हमको..
भरते है आहे बस इन्तजार में...
तुम जो अगर होती साथ तो..
समय न गुजरता बेकार में..
हो जाते हम इक दूजे के यहाँ...
दिल नहीं तडफता बेकरार में...
सुना है बहुत से दीवाने है तेरे..
समझ लो हम भी है कतार में...
हमसफ़र
जानेमन मेरा हमसफ़र बन जा..
मेरी उम्मीदों का असर बन जा.
चल रहा हू अनजानी राहो में...
मेरे विश्वास की डगर बन जा...
तुमको माना हू दिल से अपना...
मेरी मुहब्बत का खबर बन जा..
हो जाउंगा तुम्हे पाकर निहाल...
मेरी आशाओं की नजर बन जा...
बसाया हू तुम्हे दिले मकान में .....
मेरी आरजुओ का घर बन जा...
मेरी उम्मीदों का असर बन जा.
चल रहा हू अनजानी राहो में...
मेरे विश्वास की डगर बन जा...
तुमको माना हू दिल से अपना...
मेरी मुहब्बत का खबर बन जा..
हो जाउंगा तुम्हे पाकर निहाल...
मेरी आशाओं की नजर बन जा...
बसाया हू तुम्हे दिले मकान में .....
मेरी आरजुओ का घर बन जा...
Monday, 28 November 2011
तुषारापात
हमारी आशाओं पर तुषारापात न करो.
देकर नफरत अरमां पे आघात न करो..
तुम्हारे ही खातिर हमने
प्यार जवां रखा है
चाहत है सुर्ख इरादों में
निखार जवां रखा है
दिल में हमारे दर्द की बरसात न करो.
हमारी आशाओं पर तुषारापात न करो..
नफरत हमने झेला है
इस खुदगर्ज संसार में
मिला है बस रंज ही रंज
स्वार्थ के बेमतलबी धार में
देकर जख्म हमें उपेक्षित बलात न करो.
हमारी आशाओं पर तुषारापात न करो..
बिखर गए है जहां में
मोतियों की माला जैसे
अश्क गहन है आखों में
होटों में छलकते प्याला जैसे
अश्रु में डुबो कर हम पे बज्राघात न करो.
हमारी आशाओं पर तुषारापात न करो..
हमारी आशाओं पर तुषारापात न करो..
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